प्रिय विद्यार्थियों सभी प्रश्नों का उत्तर निश्चित दिया गया है
*(ii)* उनकी लोकप्रियता का मुख्य मर्म उनका गानपन (गाने का अंदाज), स्वरों की निर्मलता और नादमय उच्चारण है।
*(iii)* लता मंगेशकर के पिता का नाम दिनानाथ मंगेशकर यथा और वे खुद एक सुप्रसिद्ध गायक थे।
*(iv)* लता मंगेशकर जैसे कलाकार जो शताब्दियों में शायद एक ही बार पैदा होते हैं और अपनी कला से अमिट छाप छोड़ते हैं, वे अमर होते हैं।
*(v)* इस गद्यांश के लिए उचित शीर्षक ‘स्वर साम्राज्ञी : लता मंगेशकर’ या ‘भारतीय संगीत और लता मंगेशकर’ हो सकता है।
*(ख) (i)* भारतीय पौराणिक गाथाओं के अनुसार सूर्य के माता-पिता थे–अदिति और कश्यप।
*(ii)* वेदों में सूर्य को एक पहिएवाले सुनहरे रथ पर सवार देवता कहा गया है।
*(iii)* सूर्य का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री सरयु या संज्ञा से हुआ। *(iv)* मनु वैवस्वत, यम और यमुना (नदी) सूर्य के तीन बच्चे हुए। *(v)* विश्वकर्मा ने सूर्य की आभा के अंश को काट कर विष्णु का सुदर्सन चक्र, शिव का त्रिशूल, यम का दंड, स्कंद का भाला और कुबेर की गदा तैयार की।
*2. (क) (i)* आदमी को अपनी जिंदगी मजेदार बनाने के लिए खाने, पीने, चलने, फिरने आदि की जरूरत है।
*(ii)* बातचीत के जरिए चित्त हल्का और स्वच्छ हो परम आनंद में मग्न हो जाता है।
*(iii)* बातचीत की सीमा दो से लेकर वहाँ तक रखी जा सकती है, जहाँ तक उसकी मीटिंग जगत की सभा न समझ ली जाय।
*(iv)* बातचीत के संदर्भ में जायसन का यह कहना है कि बोलने से ही मनुष्य के रूप का साक्षात्कार होता है।
*(v)* आर्ट ऑफ कनवरसेशन योरप के लोगों में बात करने का हुनर है।
*(ख) (i)* चंपारण में बारहवीं सदी से लगभग तीन सौ वर्ष तक कर्णाटवंश का राज्य था।
*(ii)* कर्णाट वंश के प्रथम राजा नान्यदेव थे।
*(iii)* राजा हरिसिंहदेव को 1325 ई. में मुसलमान आक्रमणकारी गयासुद्दीन तुगलक का मुकाबला करना पड़ा।
*(iv)* हरिसिंहदेव का दुर्ग वन की गहराई में निश्चल छिपा हुआ था।
*(v)* हरिसिंहदेव का गढ़ अपना घोंसला छोड़ बैठा और उन्हें नेपाल भाग जाना पड़ा।
3.* *(क) वर्षा ऋतु निबंध
*(i) प्रारंभ–* भारत ऋतुओं का देश है, जहाँ छह ऋतुएँ बारी-बारी से आती हैं। ग्रीष्म ऋतु की भीषण गर्मी से जब धरती तपने लगती है और जन-जीवन व्याकुल हो उठता है, तब ऋतुओं की रानी वर्षा का आगमन होता है।
*(ii) सौंदर्य–* वर्षा ऋतु के आते ही प्रकृति का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है। सूखी और पूरी धरती हरी घास की मखमली चादर ओढ़ लेती है। पेड़ों पर नई पत्तियाँ आ जाती हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है। बागों में मोर नाचने लगते हैं। नदियों, तालाब और झरने जल से लबालब भर जाते हैं, जो देखने में अत्यंत मनोरम लगते हैं।
*(iii) लाभ–* वर्षा ऋतु हमारे देश की अर्थव्यवस्था और जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती है। धान, मक्का और गन्ने जैसी फसलों के लिए वर्षा का जल अमृत के समान है। यह केवल प्यास ही नहीं बुझाती, बल्कि भू-जल स्तर को भी बढ़ाती है। भीषण गर्मी से राहत मिलना इसका सबसे बड़ा तात्कालिक लाभ है। *(iv) हानि–* अति सर्वत्र वर्जयेत–जब वर्षा सीमा से अधिक होती है, तो यह विनाशकारी रूप ले लेती है। अत्यधिक वर्षा से नदियों में बाढ़ आ जाती है। जिससे जन-धन की भारी हानि होती है। कच्चे मकान गिर जाते हैं। और फसलों को नुकसान पहुँचता है। जल भराव के कारण मच्छर पनपते हैं। जिससे मलेरिया, डेंगू हैजा जैसी बीमारियाँ फैलने का डर रहता है। कीचड़ के कारण रास्तों पर चलना भी दूभर हो जाता है।
*(v) उपसंहार–* कुछ कमियों के बावजूद, वर्षा ऋतु समस्त जीव-जगत के लिए एक वरदान है। यह जीवन का संचार करने वाली ऋतु है। इसके बिना हरियाली और अन्न की कल्पना करना असंभव है। यदि हम जल संरक्षण के उचित उपाय करें तो हम वर्षा के जल का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और इसकी हानियों को कम कर सकते हैं।
*(ख) भारतीय नारी*
*(i) भूमिका–* भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। प्राचीन काल से ही कहा है–"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता", अर्थात् जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवताओं का निवास होता है। भारतीय नारी सहनशीलता, ममता और त्याग की प्रतिमूर्ति है।
*(ii) नारी का महत्व–* एक नारी न केवल एक परिवार को जोड़कर रखती है, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वह माता के रूप में प्रथम गुरु है। पत्नी के रूप में अर्धांगिनी है और बहन-बेटी के रूप में स्नेह का स्रोत है। आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण में नारी का योगदान अतुलनीय है। आज वह घर की चारदीवारी से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।
*(iii) ऐतिहासिक स्थिति–* इतिहास गवाह है कि प्राचीन भारत (वकाल) में नारी की स्थिति बहुत सुदृढ़ थी। गार्गी, मैत्रेयी और अपाला जैसी विदुषी महिलाओं ने शास्त्रार्थ में अपनी योग्यता सिद्ध की थी। मध्यकाल में कुछ कुप्रथाओं (जैसे पर्दा प्रथा और सती प्रथा) के कारण उनकी स्थिति में गिरावट आयी। किंतु, रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुल्तान और बेग बीबी जैसी वीरांगनाओं ने साबित कर दिया कि भारतीय नारी कमजोर नहीं है।
*(iv) वर्तमान स्थिति–* आज की भारतीय नारी स्वतंत्र और आत्मनिर्भर है। शिक्षा के प्रसार से उसे जागरूक बनाया है। वर्तमान में नारी अंतरिक्ष (कल्पना चावला) से लेकर खेल के मैदान (पी.वी. सिंधु, मिताली राज) राजनीति, सेना और व्यापारिक जगत में अपनी सफलता का परचम लहरा रही है। सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान ने समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाया है।
*(v) उपसंहार–* भारतीय नारी ने सदियों के संघर्ष के बाद अपना खोया हुआ सम्मान पुन: प्राप्त किया है। हालाँकि, आज समाज के कुछ हिस्सों में भेदभाव है, जिसे दूर करना हम सबकी जिम्मेदारी है। नारी का सम्मान करना विकसित समाज की अनिवार्यता है।
*(ग) भ्रमण का महत्व*
*(i) भूमिका–* मानव स्वभाव से ही जिज्ञासु रहा है। उसे नई चीजों को जानने और देखने की हमेशा उत्सुकता रहती है। भ्रमण इसी जिज्ञासा को शांत करने का सबसे उत्तम साधन है। प्रसिद्ध कहावत है कि "दुनिया एक किताब है और जो भ्रमण नहीं करते, वे केवल उसका एक पन्ना ही पढ़ पाते हैं।" भ्रमण केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षा का एक अभियान अंग है।
*(ii) भ्रमण का महत्व–* भ्रमण का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है : व्यावहारिक ज्ञान, जो बातें हम किताबों में पढ़ते हैं, भ्रमण के माध्यम से उन्हें प्रत्यक्ष देख सकते हैं। ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा हमें इतिहास को करीब से समझने में मदद करती है। मानसिक स्वास्थ्य–रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से दूर भ्रमण हमें मानसिक शांति और ताजगी देता है। यह तनाव को कम करने और रचनात्मक बढ़ाने में सहायक है।
भ्रमण (यात्रा) हमें आत्मनिर्भर बनना और नई परिस्थितियों में खुद को ढालना सिखाती है।
*(iii) भ्रमण के समय आने वाली चुनौतियाँ–* कभी-कभी यातायात के साधनों (बस, ट्रेन या फ्लाइट) की देरी या खराब मौसम यात्रा में बाधा डाल सकता है। साथ ही अंजान जगह पर अच्छे ठहरने के स्थान की कमी हो सकती है। किसी नई जगह पर स्थानीय भाषा न समझ पाने के कारण संचार में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा खान-पान का अचानक बदलाव स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। यात्रा के दौरान धन की कमी या सामान चोरी होने जैसी सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती है।
*(iv) निष्कर्ष–* भ्रमण जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। चुनौतियों तो जीवन के हर क्षेत्र में होती हैं। लेकिन यात्रा से मिलने वाले अनुभव और यादें उन चुनौतियों से कहीं अधिक मूल्यवान होती हैं। एक सफल यात्रा के लिए पूर्व-नियोजन और सावधानी आवश्यक है। अत: हमें समय-समय पर भ्रमण पर निकलते रहना चाहिए ताकि हम दुनिया को और बेहतर तरीके से समझ सकें।
*(घ) युवा पीढ़ी और नशीले पदार्थ*
*(i) भूमिका–* किसी राष्ट्र की उन्नति उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है। युवा पीढ़ी और सपनों से भरी होती है। लेकिन आज के दौर में "नशा" एक ऐसी दीमक बना गया है जो इस ऊर्जा को खोखला कर रहा है। नशीले पदार्थों का सेवन न केवल स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के पतन का कारण बनता है।
*(ii) युवाओं का नशीले पदार्थ के जाल में फंसना–* युवाओं के इस जाल में फंसने के कई कारण हैं। अक्सर आधुनिक दिखने की होड़, बुरी संगति या केवल जिज्ञासा के कारण युवा नशे की शुरुआत करते हैं। इसके अलावा, पढ़ाई का बढ़ता तनाव, पारिवारिक कलह, या बेरोजगारी से उपजी निराशा भी उन्हें इस ओर धकेल देती है।
*(iii) नशे के प्रकार–*
*तरल पदार्थ :* शराब और बीयर का सेवन।
*तम्बाकू उत्पाद :* सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और खैनी,
*घातक दवाएँ और ड्रग्स–* अफीम, गांजा, चरस, हेरोइन, कोकीन और ब्राउन सुगर।



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