पर्यावरण क्या है उसका महत्व बताए पर्यावरण से संबंधित सारी जानकारी सुमित जी के पर्यावरण दिवस क्या है पर्यावरण पर निबंध लिखें

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इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना बहुत जरूरी है कि पर्यावरण जलवायु, स्वच्छता, प्रदूषण तथा वृक्ष का संपूर्ण योग है। जो हमारे दैनिक जीवन से सीधा संबंध रखता है तथा उसे प्रभावित करता है वैज्ञानिक प्रगति परिणामस्वरूप मिलों, कारखानों तथा वाहनों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि आजकल पर्यावरण की समस्या उत्पन्न हो गई है।
मानव और पर्यावरण एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं। अगर हमारी जलवायु में थोडा-सा भी परिवर्तन होता है तो इसका सीधा असर हमारे शरीर पर दिखने लगता है। अगर ठंड ज्यादा पडती है तो हमें सर्दी हो जाती है लेकिन अगर गर्मी ज्यादा पडती है तो हम सहन नहीं कर पाते हैं।
पर्यावरण प्राकृतिक परिवेश है जो पृथ्वी पर बढने, पोषण और नष्ट करने में सहायता करती है। प्राकृतिक पर्यावरण पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में एक महान भूमिका निभाता है और यह मनुष्य, जानवरों और अन्य जीवित चीजों को विकसित करने में मदद करता है। मनुष्य अपनी कुछ बुरी आदतों और गतिविधियों से अपने पर्यावरण को प्रभावित कर रहे हैं।
पर्यावरण का अर्थ : पर्यावरण का तात्पर्य हमारे चारों ओर के वातावरण और उसमें निहित तत्वों और उसमें रहने वाले प्राणियों से है। हम अपने चारों ओर उपस्थित वायु, भूमि, जल, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे आदि सभी को अपने पर्यावरण में शामिल करते हैं। जिस तरह से हम अपने पर्यावरण से प्रभावित होते हैं उसी तरह से हमारा पर्यावरण हमारे द्वारा किए गए से कृत्यों से प्रभावित होता है।
लकड़ी के लिए काटे गए पेड़ों से जंगल समाप्त हो रहे हैं और जंगलों के समाप्त होने का असर जंगल में रहने वाले प्राणियों के जीवन पर पड़ रहा है। जीवों की बहुत सी प्रजातियाँ विलुप्त हो गई है और बहुत सी जातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। आज के समय में शेर अथवा चीतों के द्वारा गाँव में घुसने और वहाँ पर रहने वाले मनुष्यों को हानि पहुँचाने की बात बहुत आम हो गई है।
लेकिन ऐसा यूँ ही रहा है? यह इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने इन प्राणियों का घर छीन लिया है और अब में मारी गाव और शहरों की तरफ जाने के लिए मजबूर हो गए हैं और अपने जीवन यापन के लिए मनुष्यों को हानि पहुँचाने लगे हैं। पर्यावरण से तात्पर्य केवल हमारे आस-पास के वातावरण से नहीं है बल्कि हमारा सामाजिक और जव्हारिक वातावरण भी इसमें शामिल है। मानव के आस-पास उपस्थित सोश्ल, कल्चरल, एकोनोमिकल डायोलॉजिफन और फिजिकल आदि सभी तत्व जो मानव को प्रभावित करते 3] वे सभी वातावरण में शामिल होते है।
पर्यावरण प्रदूषण के कारण पर्यावरण प्रदूषण के बहुत से कारण है जिससे हमारा पर्यावरण बहुत अधिक प्रभावित होता है। मानव द्वारा निर्मित फैक्ट्री से निकलने वाले अवशेष हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। लेकिन यह भी संभव नहीं है कि इस विकास की दौड़ में ह अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अपने विकास कोर अंदाज कर दें।
हम कुछ बातों को ध्यान में रखकर अपने
मर्यावरण को द्रषित होने से गया राजते हैं। कारखानों को चिनियाँ नोची लगी होती हैं जिसकी वजह से उनसे निकलने वाला धुआं हमारे वारों और प्रातावरण में फैल जाता है। आज के समय में घर में इतने सदस्य नहीं होते हैं जितने अधिक वाहन होते हैं। घर बच्चा भी साइकिल की जगह पर गाड़ी चलाना पसंद करता है। छोटा गिल कारस्थानों तथा कारागिक इलाकों से बाहर निकलने वाले धुएं तथा विषैली गैसों ने पर्यावरण की समस्या को उत्पन्न कर दिया है। बों, करों, ट्रकों, गुओं से इतना अधिक हुआ और विषैली गैस निकलती है जिससे प्रदुरूण की समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही
हती नदि के पानी में सीवर की गंदगी इस तरह से मिल जाती है जिससे मनुष्यों और पशुओं के पीने का पानी गंदा हो जाता है जिसके परिणामस्वरूण दोनों निर्बलता, बीमारी तथा गंभीर रोगों के शिकार बन जाने हैं। बड़े-बड़े नगरों में झोंपड़ियों के निवासियों ने इस समस्या को अधिक गंभीर कर दिया गई है। शहरीकरण और आधुनिकीकरण पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण है। मनुष्य द्वारा अपनी सुविधाओं के लिए पर्यावरण को नजर अंदाज करना एक बहुत ही आग बात हो मनुष्य वा कुछ सोचे समझे पेड़ों को काटता जा रहा है लेकिन यह यह नहीं सोचता है कि जीवन जीने के लिए यागु न्हीं पेड़ों से प्राप्त होती है।
दुई आबादी हमारे पर्यावरण के प्रम का एक बहुत ही प्रमुख कारण है। जिस देश लगातारक रही है उस देश में रहने और स्थाने की समस्या भी बहती जा रही है। मनुष्य अपनी सुख-सुविधाओं के लिए पर्यावरण को महत्व नहीं देता है लेकिन यह भूल जाता है कि बिना के उसकी
सुख-सुविधाएँ कुछ समय के लिए ही हैं।
पर्यावरण की रक्षा के लिए कदम हम जिस पर्यावरण में रहते हैं यह बहुत तेजी से दुनि होता जा रहा है। हमें आवश्यकता है कि ह अपने पर्यावरण की देखरेख और संरक्षण जीक तरीके से करें हमारे देश में पर्यावरण रक्षण की परंपरा बहुत पहले से ज्नी आ रही है। हमारे पूर्वजों ने विभिन्न जीवों को देवी-देवताओं की सवारी मानकर और विभिन्न वक्षों में देवी देवताओं का निवारा मानकर जनका संरक्षण किया है।
मर्यावरण संरक्षण गानय और पर्यावरण के बीच संबंधों को सुधारने की एक प्रक्रिया होती है जिसके दो उद्देश्य होते हैं। पहला उन कियाकलापों का प्रबंधन होता है जिनकी वजह से पर्यावरण को हानि होती है। दूसरा मानव की जीवन शैली को पर्यावरण की प्राकृतिक व्यवस्था के अनुरूप आवरणरक बनाना जिससे पर्यावरण की गुणवत्ता बनी रह सके
कारखानों से निकलने वाले हुए और पदार्थों का उचित प्रकार से निस्तारण किया जान चाहिए। प्रदूषण और गंदगी की समस्या का निदान बहुत अधिक आवश्यक है ताकि हमारे पर्यावरण की रक्षा हो सके। सभी मिल कारस्थानों तथा व्यवसायिक उलाकों में अभिल्ब प्रदूषण नियंत्रण के लिए संपत्र लगाए जाने चाहिए।
उन रामत्रों के द्वारा धुए और दिली गैयाँ फो सीधे में ही निति किन जाना चाहिए। बड़े नगरों में बस, कारों, ट्रकों, स्कूटरों के रखरखाव की उचित व्यवस्था होनी चाहिए और उनकी गति से चेकिंग भी करवानी चाहिए हरे पौधों का रोपण किया जाना चाहिए तथा पेड़ों की सुरक्षा की बड़े-बड़े जानी चाहिए।
शांतिपूर्ण जीवन के लिए शो वाली को सोगित और नियंत्रित किया जाना चाहिए। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सभी पुरुषों महिलाओं और बच्चों को अपना पूर राहण देना चाहिए। विषैले और खतरनाक अपशिए पदार्थों के निपटान के लिए सख्त कानूनों का प्रावधान होना चाहिए। संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के लिए जनजागरण किया जाना चाहिए। कृषि में रासायनिक कीटनाशकों का कम प्रयोग करना चाहिए। वन प्रबंधन से वनों के क्षेत्रों में वृद्धि करनी चाहिए। किनारा योजनाओं को आरंभ करने से पहले पर्यावरण पर उनके प्रभाव का आकलन कर लेना चाहिए। गनुष्य को अपने मारा करने की कोशिश करनी को समस्या चाहिये। कम हो किया जो कारखाने स्थापित चुके है उन्हें तो दूसरे स्थान पर स्थापित नहीं जा सकता है लेकिन अब सरकार को इस बात का ध्यान रन चाहिए कि जो भी नए कारखाने खुले यो शहर से दूर हो । कारखानों द्वारा किया गया प्रदूषण शहर की जनता को प्रभावित न करे। मनुष्य को अपने द्वारा किए गए प्रदूषण को कम करने की कोशिश करनी चाहिए।
जितना हो सके वाहनों का कम प्रयोग करना पन्जिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करके भी इस समस्या किया जा सकता है। हमारे वैज्ञानिकों भी धुएं को काबू करने के लिए प्रयास जाने चाहिए। जंगलों की राजा सुनाई जानी चाहिए जाने चाहिए। माहिए। कम द्वारा लिए कटाई पर राखन तथा गए पेड़ लगाए को
विश्व पर्यावरण दिवस विश्व पर्यावरण दिवस को जून से 16 विपर्याण के लगाए जाते से के बीच जून दिन मनाया जाता हैजगह पर पेड़-पौधे पर्यावरण से संबंधित बहुत 5 जून का विशेष हैं से कार्य किए और जाते हैं जिसमें आज के समय को होता है। स्तर पर पर्यावरण करना चाहिए। को में संतुलित रखने के अपने लिए प्रयास
प्रत्येक और आगे धायद इस है। किसी भी एक समूह पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त होना की कोशिश की बात नहीं है। इस पर कोई भी नियम या कानून लागू पाया जा सकता है। अगर बारे में सोचे समस्या करके काबू नहीं मनुष्य दुष्प्रभाव के पाया जा सकता इसके आने समस्या वाली पीढ़ी से के निजात
राज्य कुछ सरकारों ने पर्यावरण की उपसंहार सुरक्षा के लिए बहुत पास किए सरकार है। केंद्रीय सुरक्षा के लिए के समाधान के लिए ही सहायक एवं उपयोगी है। विकास की कमी और विकास से कानून भी के अंतर्गत पर्यावरण की एक मंत्रालय कार्यरत है। इस जन साधारण कर समस्या सहयोग बहुत सिद्ध चुनोतियों होती है। होता से भी अधिक व्यवहार्य के साधनों के विकास प्रयास के संदर्भ भविष्य की उत्पन्न को खत्म करने केवल उन्मूलन के बहुत जोरदार में सार्थक हो सकती है।


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