अहमदनगर का किला - Class 8 पाठ-1
CBSE पैटर्न पर आधारित प्रश्न उत्तर
अहमदनगर का किला, 13 अप्रैल 1944
यह मेरी नौवीं जेलयात्रा थी। हमें यहाँ आए बीस महीने से भी अधिक समय हो चुका था। जब हम यहाँ पहुँचे तो अँधियारे आकाश में झिलमिलाते दूज के चाँद ने हमारा स्वागत किया। शुक्ल-पक्ष शुरू हो चुका था। तब से हर बार जब नया चाँद उगता है तो जैसे मुझे याद दिला जाता है कि मेरे कारावास का एक महीना और बीत गया। चाँद मेरे बंदी जीवन का स्थायी सहचर रहा है। वहीं मुझे इस बात की याद दिलाता है कि अँधेरे के बाद जाला होता है।
सन् 1953 में जवाहरलाल नेहरू ने अहमदनगर किले की पुनः यात्रा की
1. पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: पंडित जवाहरलाल नेहरू। यह अंश उनकी किताब "Discovery of India" से लिया गया है।
2. अहमदनगर के किले में नेहरू कब और क्यों कैद थे?
उत्तर: 9 अगस्त 1942 को *"भारत छोड़ो आंदोलन"* के दौरान नेहरू जी को गिरफ्तार कर अहमदनगर किले में रखा गया। ये उनकी *नौवीं और आखिरी जेलयात्रा* थी। वे यहाँ *9 अगस्त 1942 से 28 मार्च 1945* तक लगभग *32 महीने* कैद रहे।
3. "चाँद मेरे बंदी जीवन का स्थायी सहचर रहा है" - इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: नेहरू जी के लिए चाँद समय का प्रतीक था। हर महीने नया चाँद उन्हें याद दिलाता था कि जेल का एक महीना और बीत गया। चाँद उम्मीद का प्रतीक है - *"अँधेरे के बाद उजाला होता है"* यानी दुख के बाद सुख और गुलामी के बाद आजादी जरूर आएगी।
4. दूज का चाँद और शुक्ल-पक्ष का क्या महत्व है?
उत्तर:दूज का चाँद शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन दिखता है। *शुक्ल-पक्ष* में चाँद रोज बड़ा होता है यानी अँधेरे से उजाले की ओर जाना। नेहरू जी इसे *आजादी की उम्मीद* से जोड़ते हैं।
5. अहमदनगर का किला क्यों प्रसिद्ध है?
1. यहाँ *नेहरू जी ने "Discovery of India"* लिखी थी।
2. यहाँ *मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, सरदार पटेल, आचार्य कृपलानी* जैसे नेता भी कैद थे।
3. यह किला *1490 में अहमद निजाम शाह* ने बनवाया था।
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
Q1. नेहरू जी की यह कौन-सी जेलयात्रा थी?
Ans: नौवीं और अंतिम जेलयात्रा।
Q2. 13 अप्रैल 1944 को नेहरू जी को जेल में कितना समय हो चुका था?
Ans: बीस महीने से भी अधिक समय।
Q3. नेहरू जी को चाँद से क्या प्रेरणा मिलती थी?
Ans: चाँद उन्हें याद दिलाता था कि *अँधेरे के बाद उजाला होता है*, यानी जेल के बाद आजादी मिलेगी।
Q4. "Discovery of India" पुस्तक कहाँ लिखी गई?
Ans: अहमदनगर के किले में, 1944 में।
दूसरी जेलों की तरह यहाँ अहमदनगर के किले में भी मैंने बागवानी करना शुरू कर दिया। मैं रोज कई घंटे, तपती धूप में भी फूलों के लिए क्यारियाँ बनाने में बिताने लगा। मिट्टी बहुत खराब थी पथरीली और पुराने मलबे और अवशेषों से भरी हुई। चूँकि यह इतिहास-स्थल है इसलिए अतीत में इसने कई युद्ध और राजमहलों की दुर्भिसन्धियाँ देखी हैं। यहाँ का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। घटनाओं की दृष्टि से इसकी कोई विशेष अहमियत भी नहीं है। पर इससे जुड़ी एक घटना, आज भी याद की जाती है। यह घटना है चाँद बीबी नाम की एक सुंदर महिला का साहस की कहानी, जिसने इस किले की रक्षा के लिए अकबर की शाही सेना के विरुद्ध, हाथ में तलवार उठाकर अपनी सेना का नेतृत्व किया। पर अंत में उसकी हत्या उसके अपने ही एक आदमी के हाथों हुई।
खुदाई के दौरान हमें ज़मीन की सतह के बहुत नीचे दबे हुए प्राचीन दीवारों के हिस्से और कुछ गुंबदों और इमारतों के ऊपरी हिस्से मिले। हम बहुत दूर नहीं जा सके क्योंकि न तो अधिकारियों से इसकी मंजूरी मिली और न ही हमारे पास इस काम को जारी रखने के साधन थे। अब मैंने कुदाल छोड़कर हाथ में कलम उठा ली है। पर मैं जब तक आजाद नहीं हो जाता और कर्म के माध्यम से वर्तमान को अपने अनुभव का हिस्सा नहीं बना लेता, मैं उसके बारे में नहीं लिख सकता। न ही पैगंबर की भूमिका अख्तियार कर मैं फ़िलहाल भविष्य के बारे में लिख सकता हूँ। बचा रहता है अतीत, पर मैं उसके बारे में भी किसी इतिहासकार या विद्वान की तरह विद्वतापूर्ण शैली में नहीं लिख सकता। मैं पहले की ही तरह, अपने आज के विचारों और क्रियाकलापों के साथ संबंध स्थापित करके ही उसके बारे में कुछ लिख सकता हूँ। गेटे ने एक बार कहा था कि इस तरह का इतिहास लेखन अतीत के भारी बोझ से एक सीमा तक राहत दिलाता है।
अतीत का दबाव
दबाव, भला हो या बुरा, दोनों तरह अभिभूत करता है। कभी-कभी यह दबाव दमघोंटू होता है-खास तौर पर उन लोगों के लिए जिनकी जड़ें बहुत पुरानी सभ्यताओं में होती हैं-मसलन भारत और चीन की सभ्यताएँ।
आखिर मेरी विरासत क्या है? मैं किन बातों का उत्तराधिकारी हूँ? क्या उन सबका जिसे मानवता ने दरियों हजारों साल के दौरान हासिल किया। उसकी विजयों के उल्लास का, उसकी पराजयों की दुखद यंत्रणा का, मानव के उन हैरतअंगेज साहसिक कार्यों का जिनकी शुरुआत युगों पहले हुई और जो अब भी जारी हैं और हमें आकर्षित करती हैं। मैं इस सबका वारिस हूँ, साथ ही उस सबका भी जिसमें पूरी मानव जाति की साझेदारी है। हम भारतवासियों की विरासत में एक खास बात है, जो अनोखी नहीं है, क्योंकि कोई व्यक्ति औरों से एकदम अलग नहीं होता। अलबत्ता एक बात हम लोगों पर विशेष रूप से लागू होती है, जो हमारे रक्त, मांस और अस्थियों में समाई है। इसी विशेषता से हमारा वर्तमान रूप बना है और हमारा भावी रूप बनेगा।
इसी विशिष्ट विरासत का विचार और वर्तमान पर इसे लागू करने की बात एक लंबे अरसे से मेरे मन में घर किए है। मैं इसी के बारे में लिखना चाहता हूँ। विषय की कठिनाई और जटिलता मुझे भयभीत करती है। मुझे लगता है कि मैं सतही तौर पर इसका स्पर्श ही कर सकता हूँ।
*1. "अतीत का भार" से लेखक का क्या तात्पर्य है?*
*उत्तर:* नेहरू जी के अनुसार अतीत का भार मतलब *इतिहास का दबाव* है। भारत-चीन जैसी पुरानी सभ्यताओं पर हजारों साल का इतिहास, संस्कृति, विजय-पराजय का बोझ होता है। ये बोझ कभी प्रेरणा देता है, कभी दम घोंटता है।
*2. चाँद बीबी कौन थी? अहमदनगर के किले से उसका क्या संबंध है?*
*उत्तर:* चाँद बीबी *अहमदनगर की शासक* थी। 1595 में उसने *अकबर की मुगल सेना* के खिलाफ खुद तलवार लेकर किले की रक्षा की थी। गद्दारों ने उसकी हत्या कर दी। ये घटना अहमदनगर किले के इतिहास की सबसे बहादुरी वाली घटना है।
*3. नेहरू जी ने कुदाल छोड़कर कलम क्यों उठाई?*
*उत्तर:* जेल में बागवानी करते समय खुदाई में पुरानी दीवारें मिलीं। पर खुदाई की मंजूरी नहीं थी। इसलिए नेहरू जी ने *"Discovery of India"* लिखना शुरू किया। वे इतिहास को वर्तमान से जोड़कर लिखना चाहते थे।
*4. "अँधेरे के बाद उजाला होता है" और "अतीत का भार" में क्या संबंध है?*
*उत्तर:* चाँद से उम्मीद मिली कि गुलामी के बाद आजादी आएगी। लेकिन आजादी के बाद भी *हजारों साल पुरानी विरासत का बोझ* रहेगा। उसी विरासत से नया भारत बनाना है।
*5. गेटे ने इतिहास लेखन के बारे में क्या कहा था?*
*उत्तर:* जर्मन कवि *गेटे* के अनुसार अगर हम इतिहास को अपने आज के विचारों से जोड़कर लिखें तो *अतीत का भारी बोझ हल्का* लगता है। नेहरू जी ने यही तरीका अपनाया।
*महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर - CTET/STET के लिए
*Q1. अहमदनगर के किले का इतिहास किस महिला शासक से जुड़ा है?*
*Ans:* चाँद बीबी से।
*Q2. नेहरू जी ने जेल में कौन-सी प्रसिद्ध पुस्तक लिखी?*
*Ans:* The Discovery of India / भारत की खोज।
*Q3. नेहरू जी के अनुसार भारत और चीन की सभ्यताओं पर कैसा दबाव है?*
*Ans:* अतीत का दमघोंटू दबाव, क्योंकि इनकी जड़ें हजारों साल पुरानी हैं।
*Q4. लेखक अपनी विरासत किसे मानते हैं?*
*Ans:* मानवता की हजारों साल की विजय, पराजय, साहसिक कार्यों को। पूरी मानव जाति की साझा विरासत को।
*Q5. "रक्त, मांस और अस्थियों में समाई" विशेषता से क्या बना है?*
*Ans:* हमारा वर्तमान रूप बना है और भावी रूप बनेगा।
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