■बड़ी संख्या में कॉलेज शिक्षकों ने केंद्रों पर नहीं दिया योगदान
■ बोर्ड ने कहा- नहीं किया गया है कॉलेज शिक्षकों को मुक्त
इंटर परीक्षा फिलॉसफी में नहीं आया एक भी परीक्षक
गणित, भौतिकी से लेकर अंग्रेजी तक के शिक्षक नहीं मिलने से इंटर की कॉपी जांच अटक गई है। कॉपी जांच में विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों पर साइंस के शिक्षकों की कमी सामने आ रही है। जिले में पांच केन्द्रों पर इंटर की कॉपी जांच चल रही है। इसमें साइंस विषयों में शिक्षकों की कमी है। प्रतिनियुक्त शिक्षकों में बड़ी संख्या में कॉलेज के शिक्षकों ने मूल्यांकन केंद्रों पर शनिवार शाम तक योगदान नहीं दिया था। वहीं, बोर्ड ने मूल्यांकन केन्द्रों से मिली रिपोर्ट के बाद सख्ती की है। बोर्ड ने कहा है कि कॉलेज शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य से मुक्त नहीं किया गया है। इन शिक्षकों ने बोर्ड से मूल्यांकन से मुक्त करने की मांग की थी, लेकिन बोर्ड ने इसे अस्वीकार कर दिया था। बोर्ड ने निर्देश
चैपमैन स्कूल केन्द्र पर हिंदी के साथ फिलॉसफी की कॉपियां भी जांच के लिए भेजी गई हैं। यहां फिलॉसफी में एक भी परीक्षक आए ही नहीं हैं। ऐसे में इस विषय का बंडल अब तक खुला ही नहीं हैं। जिला स्कूल में अंग्रेजी की कॉपियां भेजी गई हैं। यहां अंग्रेजी के 75 में 25 परीक्षक अब तक नहीं आए हैं। डीईओ अजय कुमार सिंह ने कहा कि सभी परीक्षकों को अंतिम मौका दिया गया है। जिन विषयों में परीक्षकों की कमी है, वहां स्थानीय स्तर पर भी प्रतिनियुक्ति की जा रही है।
दिया है कि जिन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति मूल्यांकन में की गई है उन्हें हर हाल में योगदान देना है। बोर्ड ने डीएम और डीईओ को निर्देश दिया है कि योगदान नहीं देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाए। अगर आदेश के बाद भी शिक्षक नहीं पहुंचते हैं तो उनपर प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाएगी।
गणित में 45 फीसदी शिक्षक नहीं पहुंचे कॉपी जांच में, बायो में भी इंतजार : बीबी कॉलेजिएट मूल्यांकन केन्द्र पर साइंस की कॉपियां जांची जा रही हैं। यहां भूगोल की कॉपी जांचने के लिए 55 में से 43 परीक्षक पहुंच चुके हैं। लेकिन, गणित का हाल यह कि अब तक 48 परीक्षकों में से महज 26 ही पहुंचे हैं। यानि 45 फीसदी शिक्षकों ने योगदान नहीं दिया है। ऐसे में कॉपियों की जांच बेहद धीमी है। इसी तरह बायो विषय में 59 में से 45 परीक्षक ही हैं। मारवाड़ी हाईस्कूल केन्द्र पर भी साइंस की कॉपियां हैं। यहां भौतिकी की कॉपी जांची जा रही है। इस विषय की कॉपियों की जांच के लिए 60 परीक्षकों की नियुक्ति बोर्ड ने की है। इसमें से अब तक महज 34 परीक्षक ने ही योगदान दिया है। इनमें अधिकतर कॉलेजों के शिक्षक हैं।
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